राष्ट्रपति चुनाव 2022 l राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया l President Election 2022

President Election 2022 : नमस्कार दोस्तों ! आज मैं विस्तार से बात करने वाली हूँ राष्ट्रपति का चुनाव भारत मे कैसे होता है। राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के लिए क्या योग्यता होती है ? राष्ट्रपति का वेतन कितना होता है ? भारत मे राष्ट्रपति चुनाव की क्या प्रक्रिया होती है ?

दोस्तों ! जैसा की आप सब को पता है वर्तमान राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्द का बतौर राष्ट्रपति जुलाई 24 को उनका कार्यकालल पूरा हो रहा है । भारत के सवींधन के अनुसार उसके पहले नए राष्ट्रपति का चुनाव हो जाना चाहिए। और इसलिए July 21 को नए राष्ट्रपति का चुनाव हो जाएगा ।

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है । राष्ट्रपति का पद यहाँ सर्वोच्च संवैधानिक पद है । संवैधानिक प्रक्रिया के अंतर्गत हर 5 वर्षों में राष्ट्रपति का चुनाव किया जाता है ।

भारत में राष्ट्रपति के चुनाव का तरीका अनूठा है और इसे आप सबसे अच्छा संवैधानिक तरीका भी कह सकते हैं । इसमें कई देशों में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के तरीकों की अच्छी बातों को शामिल किया गया है। सबसे अच्छी बात है कि भारत के राष्ट्रपति चुनाव में सभी राजनैतिक दलों के विजयी उम्मीदवारों को शामिल किया जाता है ।

भारत के राष्ट्रपति का चुनाव अनुच्छेद 55 के अनुसार, आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के एकल संक्रमणीय मत पद्धति या एकल हस्तान्तरणीय मत पद्धति से गुप्त मतदान के द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से होता है ।

अप्रत्यक्ष निर्वाचन :

राष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मण्डल यानी इलेक्टोरल कॉलेज करता है । अर्थात जनता अपने राष्ट्रपति का चुनाव सीधे नहीं करती, बल्कि उसके मत से चुने गए प्रतिनिधित्व करते हैं । यह होता है अप्रत्यक्ष निर्वाचन ।

  • अनुच्छेद 56 के अनुसार, राष्ट्रपति शपथ की तारीख से 5 वर्ष तक अपने पद पर बना रह सकता है ।
  • अनुच्छेद 57 के अनुसार, राष्ट्रपति का पुनः निर्वाचन चुनाव के द्वारा एक व्यक्ति भारत का कितनी भी बार (अनेकों बार) राष्ट्रपति बन सकता है ।

राष्ट्रपति पद के लिए योग्यताएँ (Eligibility criteria for President election):

अनुच्छेद 58 के अनुसार, राष्ट्रपति पद के लिए निम्नलिखित योग्यताएँ हैं ।

  • राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए
  • उम्मीदवार की आयु 35 वर्ष से कम न हो ।
  • उम्मीदवार लोकसभा सदस्य बनने की योग्यता रखता हो ।
  • जिसके नाम का प्रस्ताव निर्वाचक मण्डल के 50 मतदाताओं ने किया हो और 50  ही मतदाता इस प्रस्ताव को समर्थित भी करेंगे । (1997 से प्रारम्भ हुआ)

राष्ट्रपति पद के लिए शर्तें (Conditions for Vice-President election):

अनुच्छेद 59  के अनुसार, एक राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को किसी भी सार्वजनिक तथा निजी प्राधिकरण के अधीन लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए ।

                लेकिन एक वर्तमान राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल तथा केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी भी मंत्री को लाभ के पद पर नहीं माना जाता है ।

राष्ट्रपति चुनाव में मत देने का अधिकार किसको है :

अनुच्छेद 54 के अनुसार, राष्ट्रपति पद का निर्वाचक मण्डल इस प्रकार है ।

  • लोक सभा के सभी निर्वाचित सदस्य ।
  • राज्य सभा के सभी निर्वाचित सदस्य ।
  • प्रत्येक राज्य की विधान सभा के सभी निर्वाचित सदस्य ।
  • 70वीं संवैधानिक संशोधन अधिनियम 1992 के द्वारा दिल्ली और पुडुचेरी की विधान सभाओं के सभी निर्वाचित सदस्यों को राष्ट्रपति के चुनाव में मत देने का अधिकार दिया गया ।
  • विधान परिषद के सदस्यों को राष्ट्रपति के चुनाव में मत देने का अधिकार नहीं होता ।
  • मनोनीत सदस्यों को भी राष्ट्रपति के चुनाव में मत देने का अधिकार नहीं होता ।

राष्ट्रपति चुनाव में मतों की गिनती कैसे होती है ? (How to calculate vote in president election):

राष्ट्रपति चुनाव में सबसे ज्यादा मत हासिल करने से ही जीत तय नहीं होती । महामहिम वही बनता है, जो मतदाताओं यानी सांसदों और विधायकों के मतों के कुल वेटेज का आधे से अधिक हिस्सा हासिल करे ।

                अर्थात् इस चुनाव में पहले से तय होता है कि जीतने वाले को कितने मत या वेटेज पाना होगा । फिलहाल राष्ट्रपति चुनाव के लिए जो इलेक्टोरल कॉलेज है, उसके सदस्यों के मतों का कुल वेटेज 10,98,882 है । जीत के लिए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को 5,49,442 मत हासिल करने होंगे । जो उम्मीदवार सबसे पहले यह कोटा हासिल करता है, वह चुन लिया जाता है ।

विधायक के मत :

विधायक के मामले में जिस राज्य का विधायक हो, उसकी आबादी देखी जाती है । इसके साथ उस प्रदेश के विधान सभा सदस्यों की संख्या को भी ध्यान में रखा जाता है ।

                वेटेज निकालने के लिए प्रदेश की जनसंख्या को चुने गए विधायकों की संख्या से बाँटा जाता है । इस तरह जो भी नंबर मिलता है, उसे फिर एक हजार से भाग दिया जाता है । अब जो आंकड़ा हाथ लगता है, वही उस राज्य के एक विधायक के वोट का वेटेज होता है । एक हजार से भाग देने पर अगर शेष पाँच सौ से ज्यादा हो तो वेटेज में एक जोड़ दिया जाता है ।

सांसद के मत :

सांसदों के मतों के वेटेज का गणित अलग है । सबसे पहले सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुने  गए सदस्य के मतों का वेटेज जोड़ा जाता है ।

अब इस सामूहिक वेटेज का राज्यसभा और लोकसभा के चुने गए सदस्य की कुल संख्या से भाग दिया जाता है। इस तरह जो नंबर मिलता है, वह एक सांसद के मत का वेटेज होता है । अगर इस तरह भाग देने पर शेष 0.5 से ज्यादा बचता हो तो वेटेज में एक का इजाफा हो जाता है ।

  • 14वें राष्ट्रपति के चुनाव में कुल मत मूल्य 1098884 निकाले गये।

निर्वाचन प्रक्रिया

राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणी पद्धति से होता है । इस पद्धति में मतदाता अपनी पसंद के अनुसार 1, 2, 3 के वरीयता क्रम में मत देता है । मतदान होन के बाद मतगणना शुरू होती है। मतगणना की शुरुवात में निर्वाचन कोटा  निकाल लिया जाता है ।

निर्वाचन कोटा = (कुल पड़े वैध मतो की संख्या /2 ) + 1

निर्वाचन कोटा निकालने के बाद प्रथम दौर की मतगणना शुरू होती है, इस दौर में प्रथम वरीयता के ही मत गिने जाते हैं । यदि किसी उम्मीदवार को निर्वाचन कोटा के बराबर प्रथम वरीयता के मत हासिल हो जाते हैं तो उसे विजयी घोषित कर दिया जाता है । यदि किसी भी उम्मीदवार के प्रथम वरीयता के मत निर्वाचन कोटा के बराबर नहीं हासिल होते तो दूसरे दौर की मतगणना शुरू होगी इस दौर में द्वितीय वरीयता के मत गिने जायेंगे ।

दूसरा काम यह किया जायेगा कि प्रथम दौर में जिस उम्मीदवार को सबसे कम मत मिले हैं, उसे निर्वाचन प्रक्रिया से बाहर कर दिया जायेगा । लेकिन उसके प्रथम वरीयता मतों को ले लिया जायेगा, अब इन मतों को ऊपर के उम्मीदवारों में उस अनुपात में बाँट दिया जायेगा। जिस अनुपात में उन्होंने द्वितीय वरीयता के मत हासिल किये हैं, यदि इस बंटवारे से किसी उम्मीदवार को निर्वाचन कोटा के बराबर मत हासिल हो जाते हैं तो उसे विजयी घोषित कर दिया जाता है ।

                इस तरह प्रणाली में वोटों का संक्रमण नीचे से ऊपर की ओर होता है इसलिए इसे संक्रमणीय पद्धति कहा जाता है ।

राष्ट्रपति का वेतन कितना होता है ?

आपको बता दूँ की तक भारत के राष्ट्रपति का वेतन वर्ष 2017 से पहले 1.50 लाख रुपये प्रति माह था और 2017 में इसको बढ़ाकर 5 लाख रुपये प्रति माह कर दिया गया. हालांकि वर्ष 2020 में कोरोना के कारण राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और अन्य जनप्रतिनिधियों ने अपनी सैलरी 30 फीसदी घटाने पर सहमति जताई थी.

शपथ ग्रहण : अनुच्छेद 60 के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश  शपथ दिलाता है। राष्ट्रपति पद के लिए जीता हुआ उम्मीदवार ईश्वर के नाम पर संविधान की रक्षा की शपथ लेता है इसलिए राष्ट्रपति को संविधान का अभिभावक कहा जाता है ।

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